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पहाड़ों में खोलना चाहते है होमस्टे? तो जान लें उत्तराखंड के ये 2 धांसू स्कीम! 15 लाख तक मिलेगा सब्सिडी वाला लोन

Schemes For Homestays In Uttarakhand : अगर आप पहाड़ों में अपना होमस्टे शुरू करने का सपना देख रहे हैं, तो उत्तराखंड सरकार आपके लिए सुनहरा मौका लेकर आई है. राज्य की दो दमदार योजनाओं के तहत होमस्टे खोलने वालों को 15 लाख रुपये तक का सब्सिडी वाला लोन मिल सकता है. ऐसे में आपका पहाड़ों में होमस्टे खोलने का सपना आसानी से हकीकत बन सकता है.

उत्तराखंड सरकार, अब पहाड़ों में रोजगार बढ़ाने और पलायन रोकने के लिए होमस्टे को बड़े स्तर पर बढ़ावा दे रही है. पर्यटन विभाग की पहल का ही नतीजा है कि आज प्रदेशभर में 6 हजार से अधिक होमस्टे रजिस्टर्ड हो चुके हैं. इन योजनाओं के तहत न सिर्फ वित्तीय सहायता दी जा रही है, बल्कि होमस्टे संचालकों को आतिथ्य सेवा, प्रबंधन और मार्केटिंग का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे एक ओर पर्यटकों को सस्ती दरों पर रहने और उत्तराखंड की संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों को स्थायी स्वरोजगार भी मिल रहा है.

नैनीताल जिले के पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी बताते हैं कि जिले में 909 होमस्टे रजिस्टर्ड हैं, जो कि पूरे उत्तराखंड में सबसे अधिक हैं. इसके अलावा जिले में 995 होटल, रिसॉर्ट और टैंट कॉलोनियां भी संचालित हो रही हैं. बीते 5 सालों में कुल 660 नई इकाइयां स्थापित हुई है. ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि पर्यटन उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और युवाओं के लिए कमाई के नए रास्ते खोल रहा है.

मिलेगा 15 लाख तक का लोन

पर्यटन विभाग के अनुसार, राज्य सरकार पर्यटन आधारित व्यवसायों को बढ़ाने के लिए दो प्रमुख योजनाएं संचालित कर रही है. पहली वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना है, इस योजना के तहत होमस्टे, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट, कैफे और एडवेंचर गतिविधियां शुरू करने पर 33% तक की सब्सिडी दी जाती है. इससे युवाओं का प्रारंभिक निवेश काफी कम हो जाता है. वहीं दूसरी पंडित दीन दयाल उपाध्याय होमस्टे विकास योजना है, इसके तहत होमस्टे निर्माण के लिए 15 लाख रुपये तक का लोन मिलता है, जिसमें से 50% राशि सब्सिडी के रूप में सरकार वहन करती है. आवेदन प्रक्रिया भी सरल कर दी गई है, ताकि अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें.

पर्यटन और युवाओं के सपनों को दे रहा उड़ान

होमस्टे सिर्फ आवास सुविधा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की परंपरा, भोजन और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से दिखाने का माध्यम भी है. पर्यटक यहां जाकर असली पहाड़ी संस्कृति को महसूस करते हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और प्रचार दोनों हो रहा है, ये सरकारी योजनाएं उत्तराखंड के पर्यटन और युवाओं के स्वरोजगार दोनों को नई उड़ान दे रही हैं.

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