उत्तराखंड वन विभाग: कैबिनेट की मंजूरी, दैनिक श्रमिकों को 10 साल की सेवा पर मिलेगा 18000 रुपये न्यूनतम मानदेय
उत्तराखंड वन विभाग और वन विकास निगम के दैनिक श्रमिकों को 10 साल की निरंतर सेवा पर 18,000 रुपये न्यूनतम मानदेय मिलेगा। यह निर्णय कैबिनेट की मंजूरी और श्रम विभाग की अधिसूचना के बाद वन मुख्यालय द्वारा आदेश जारी होने पर लागू होगा।
- वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को मिलेगा न्यूनतम मानदेय।
- 10 साल की निरंतर सेवा पर 18,000 रुपये मिलेंगे।
- कैबिनेट निर्णय के बाद वन मुख्यालय ने आदेश जारी किए।
देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग और वन विकास निगम में 10 साल की निरंतर सेवाएं देने वाले दैनिक श्रमिकों को प्रतिमाह न्यूनतम वेतनमान के समतुल्य 18,000 रुपये मानदेय मिलेगा। अभी तक ऐसे 589 दैनिक श्रमिक चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 304 पहले ही न्यूनतम वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं।
अब ऐसे सभी श्रमिकों को इसका लाभ मिलेगा। कैबिनेट के निर्णय के आलोक में शासन की ओर से अधिसूचना जारी करने के बाद वन मुख्यालय ने भी इस सिलसिले में आदेश निर्गत कर दिए हैं।
कैबिनेट के निर्णय के आलोक में शासन की अधिसूचना के बाद वन मुख्यालय ने जारी किए आदेश
दैनिक श्रमिकों ने न्यूनतम वेतनमान के दृष्टिगत पूर्व में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने श्रमिकों के पक्ष में निर्णय दिया। इसके बाद सरकार ने इस सिलसिले में मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की। उपसमिति ने वन विभाग और वन विकास निगम में कार्यरत दैनिक श्रमिकों की सूची मांगने के साथ ही अधिकारियों के साथ विमर्श किया। समिति ने विभाग के सभी दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान के समतुल्य मानदेय दिए जाने की संस्तुति की।
कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव रखा था
वन विभाग ने इसके आधार पर फरवरी माह में हुई कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव रखा था, जिसे चर्चा के बाद मंजूरी दे दी गई थी। इस निर्णय के आलोक में श्रम विभाग ने मार्च मध्य में दैनिक श्रमिकों के लिए निर्धारित दरें और अन्य सुविधाओं को मिलाकर न्यूनतम वेतनमान के समतुल्य 18,000 रुपये मानदेय अनुमन्य किए जाने की अधिसूचना जारी की।
अब वन मुख्यालय की ओर से मुख्य वन संरक्षक (मानव संसाधन विकास एवं कार्मिक प्रबंधन) पीके पात्रो ने गढ़वाल व कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षकों, राष्ट्रीय उद्यानों के निदेशकों और वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।




