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आईएमए ने रचा एक और इतिहास, भारतीयों के साथ अब विदेशी महिलाएं भी ले रहीं ट्रेनिंग

भारतीय सैन्य अकादमी में पहली बार विदेशी महिला कैडेट्स प्रशिक्षण ले रही हैं, जिनमें युगांडा की कैडेट्स भी शामिल हैं। ये कैडेट्स अपने देशों में सैन्य अधिकारी बनकर कमान संभालेंगी, जो उनके लिए गर्व का विषय है।

  • आइएमए में पहली बार विदेशी महिला कैडेट्स प्रशिक्षणरत
  • युगांडा समेत छह देशों की महिला कैडेट्स शामिल
  • सैन्य अधिकारी बनकर अपने-अपने देशों में संभालेंगी कमान

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में महिलाओं की भागीदारी अब एक नया इतिहास रचने की ओर बढ़ रही है। इस वर्ष जहां पहली बार नौ भारतीय महिला कैडेट पासिंग आउट परेड में सैन्य अधिकारी बनकर भारतीय सेना का हिस्सा बनीं।

वहीं अब अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे दूसरे महिला बैच में विदेशी कैडेट भी शामिल हो चुकी हैं। पहली बार विदेशी महिला कैडेट भी आईएमए से प्रशिक्षण प्राप्त कर सैन्य अधिकारी बनेंगी।

कुल 23 महिला कैडेट ले रही प्रशिक्षण 

वर्तमान में आईएमए के दूसरे महिला बैच में कुल 23 महिला कैडेट प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें छह विदेशी कैडेट भी शामिल हैं, जो मित्र देशों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इनमें पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा की कैडेट एसन और केमिगीशा डैनिएला भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। शनिवार को आयोजित पासिंग आउट परेड देखने पहुंचीं दोनों कैडेटों ने उत्साह के साथ अपने अनुभव साझा किए।

उन्होंने बताया कि वे अपने देश की पहली महिलाएं हैं जिन्हें सैन्य अधिकारी बनने के लिए भारत भेजा गया है। यह न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे युगांडा के लिए गर्व का विषय है। दोनों कैडेटों ने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण लेना उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है। यहां उन्हें केवल सैन्य कौशल ही नहीं, बल्कि नेतृत्व, अनुशासन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करने का अवसर मिल रहा है।

भारत में बिताए जा रहे समय को यादगार बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, यहां के लोगों का व्यवहार और भारतीय भोजन उन्हें बेहद पसंद आ रहा है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यहां उन्हें अपनेपन का एहसास होता है और भारतीय मेहमाननवाजी की छाप हमेशा उनके साथ रहेगी।

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